जीवन वीणा
यह ब्लॉग लिखते हुए मुझे १ बर्ष व्यतीत हो गया है। समस्त सुधि पाठकों को मेरा कोटि कोटि धन्यवाद। आप सबने मेरा ब्लॉग पढ़ा और अपने बहुमूल्य सुझाव एवं विचार व्यक्त कर मेरे उत्साह एवं ज्ञान में वृद्धि की। इस कोरोना महामारी के दौरान भी आप सब निरन्तर मेरा ब्लॉग पढ़ते रहे। आप सबने मेरी जीवन वीणा को नए सुर एवं मधुरता प्रदान की और उससे निकलने वाले संगीत को धेर्ये पूर्वक सुना। आप सब के सहयोग से ही मैं अपने ब्लॉग को गति प्रदान कर पायी हूँ और अपनी जीवन वीणा को मधुर स्वरों से सजा पा रही हूँ। आशा करती हूँ कि आगे भी आप मुझे सहयोग प्रदान करते रहेंगे। पुनः आप सब का बहुत बहुत आभार। यह एक ऐसी सुन्दर कहानी ह [जो मैंने कभी सुनी थी], जिसने मुझे बहुत कुछ सोचने के लिए विवश किया और मेरी जीवन धारा को एक नया मोड दिया। उसे मैं आप तक पहुंचना चाहती हूँ। ” एक घर मे बहुत दिनों से एक वीणा रखी हुई थी। पीढ़ीओं पहले कभी कोई उस वीणा को कोई बजाता होगा। परन्तु अब ना ही कोई उसे बजाता था और ना ही उसकी धूल साफ की जाती थी। कभी कभी कोई बच्चा खेल खेल मे उसके तार छेड़ देता था तो घर के लोंगो को वह शोर लगता था और वे नाराज हो जाते थे। जब कभ...