कोरोना वायरस व् वायु प्रदुषण


कोरोना वायरस एक ऐसा नाम ऐसी आवाज जिसकी गूंज ने चारों तरफ हाहाकार उत्पन कर दिया है ,क्या हमने कभी सोचा था की कभी कहीं ऐसी गूंज उत्पन होगी जो आतंक का पर्याय होगी , शायद नहीं। फिर ऐसा क्या हुआ की जो जहाँ था वही रुक गया। कही कोई आवाज नहीं कोई शोर नहीं , कही यह पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ का नतीजा तो नहीं , कहीं ऐसा तो नहीं क़ि मानव स्वयं को प्रकृति से ऊपर समझने लगा हो। यही सत्य है और कारण भी जिससे वातावरण दूषित होता चला गया और और हम प्रकृति का संरक्षण करने के स्थान पर उसका दोहन करने लगे ,पशु पक्षियों को आनंद के लिए अपना आहार बनाना शरू कर दिया जिसका परिणाम कोरोना- १९ के रूप मे हमारे सामने है। क्या हमने यह जानने की कोशिश कि यह कोरोना केवल मनुष्यों को ही क्यों हो रहा है जानवरों को क्यों नहीं। आज एक चींटी भी सुरक्षित है इसका कारण है मनुष्य। मनुष्य ही प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर रहा है जानवर नहीं। वायु प्रदुषण वाले वातावरण मे जीने वाले लोग हताश होते है तथा चिड़चिड़े हो जाते है तो उनका वयवहार बदलता है और तनाव होता है। प्रदूषित वातावरण मे सांसें प्रतिक्षण विकारों के साथ आती जाती है और वायु प्रदुषण निश्चित रूप से वायरस के प्रभाव को बढ़ाने में सहायक होता है जिससे फेफडें कमजोर होते हैं और वायरस फेफ़ड़ों पर आक्रमण कर देता है इसका तातपर्य हम समझ सकते हैं कि यह वायु प्रदुषण कोरोना को फैलाने में कितना सहायक रहा होगा और इस स्थिति को रातों रात नहीं बदला जा सकता है। इसके लिए लगातार प्रयास करना होगा।परन्तु प्रकृति उतनी निष्ठुर नहीं है जितना मनुष्य। इस वायरस के बहाने ही सही प्रकृति ने अपनी सत्ता को पुनः स्थापित किया और बताया क़ि इस सत्ता पर आज भी प्रकृति का अधिकार है मनुष्य तो निमित मात्र है। जो भी हो इस वायरस का परिणाम वातावरण के लिए काफी अच्छा रहा और वायु प्रदुषण पिछले २० सालों मे सबसे कम रहा। 


मैंने स्वयं अनुभव किया है क़ि कोरोना के कारण मनुष्य की आवाजाही पर रोक लगी तो वातावरण मे एक अनछुई सी सिहरन पैदा हो गयी है चारों तरफ असीम शांति । इतना शांत वातावरण , नीला आकाश , तारों की वही पुरानी चमक जो हम अपने बचपन मे आकाश मे देखा करते थे, क़ि कहाँ पर आकाश गंगा है और सप्तऋषि कहाँ पर है और नींद न आने पर तारे गिनते थे। सुबहे चिड़ियों की चहचहाट से नींद खुलती थी , बहती हुई मंद मंद सुगन्धित वायु सारी थकन को मिटाकर ऊर्जा प्रदान करती थी, आज फिर वही सब अनुभव हो रहा है आप सब भी यही अनुभव कर रहे होंगे। आपने यह भी अनुभव किया होगा की आपके पेड़ पोधो मे नयी ताजगी आगयी है फूल पहले की मुकाबले जाएदा खिले और लम्बे समय तक चले, तितलियों की संख्या में वृद्धि हुई है, चिड़ियों की अनेक प्रजातियां छत पर दिखाई देने लगी है और उनकी चहचहाट भी सुनायी देने लगी है । जो क़ि वायु प्रदुषण के न होने का संकेत करता है। 

क्या इस लॉकडाउन के समय को हमेशा की लिए लागु नहीं किया जा सकता शायद नहीं कयोंकि इससे अर्थव्यवस्था की गति रुक जाएगी। अर्थव्यवस्था भी अपनी गति से काम करती रहे और वायु प्रदुषण भी ना हो इसके लिए अपने आसपास के वातावरण को साफ रखना होगा कयोंकि प्रदुषण रुपी राक्षस हमारे वातावरण को लगातार निगल रहा है उसके लिए हम सबको औक्सीजन टैंक बनाना होगा इसके लिए जायदा से जायदा पेड़ लगाने होंगे और कम से कम काटने होंगे कयोंकि आज प्रति व्यक्ति २४ पेड़ है। औक्सीजन फैक्ट्री का निर्माण तभी हो सकता जब हम केवल पेड़ ही ना लगाए बल्कि उसका संरक्षण भी करें। तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रख सकते है । 

क्या आपने कभी पेड़ो से, तितलियों से बातें की है हवा की सरसराहट को अनुभव किया है यदि नहीं है तो आज एक बार इस शांत और वायु प्रदुषण मुक्त आसमान की नीचे बैठकर शुद्ध वायु की मधुर स्वर लहरी का आनंद ले और यही आनंद आपको वातावरण को वायु प्रदुषण से मुक्त रखने में सहयोग करेगा। हमें प्रकृति जितना भी देती है उसे स्वीकार करैं , धन्यवाद करैं प्रकृति का। एक अच्छा वातावरण आपको अच्छा स्वास्थय ,स्वस्थ जीवन और स्वस्थ मानसिक जीवन प्रदान करेगा फिर हम शान से कह सकते हैं । 

रोज़ रोज़ गिर कर मुकमल खड़ा हूँ मैं ए जिंदगी देख तुझ से कितना बड़ा हू मैँ । 

जय हिन्द ||

Comments

  1. It's true corona virus actually help the nature to reagin its form and save it from the today's actual virus human beings . Great article!

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