१२ जून २०२० - विश्व बाल श्रम दिवस
बाल श्रम की समस्या को दूर करने के लिए १२ जून को विश्व बाल श्रम दिवस मनाया जाता है। १४ वर्ष या उससे कम छोटे बच्चो से मजबूरी मे कार्य कराया जाता है तो कुछ बच्चों से जबरन तस्करी व् वेश्यावृत्ति जैसे कार्यों को कराया जाता है। बर्ष २०२० कोविद- 19 से प्रभवित वर्ष है। इस वर्ष की थीम ' बच्चो को कोविद १९ - महामारी ' है आज के परिप्रेश्ये मे इस महामारी से बच्चे सबसे जायदा प्रभावित होंगे। बाल श्रम मे अनुमानित १५२ मिलियन बच्चे है जिनमे से ७२ मिलियन बच्चे खतरनाक कार्यों मे लगे हुए होते है। बिश्व मे सरकारों द्वारा बाल श्रम क़ानून बनाए जाने की बाद भी बाल श्रम समाप्त नहीं हुआ है। अतः बच्चों को कोविद १९ की पश्चात् उत्पन्न होने वाली समस्या से बचाना है । कोविद १९ समाप्त होते ही भोजन आवास नौकरी व श्रम की समस्याएं उत्पन्न होंगी।
बाल श्रम गरीव देशो मे जाएदा साकार रूप लेता है अतः कोविद १९ का दौर समाप्त होते ही बाल श्रम सबसे जाएदा प्रभवित होगा। इसके लिए अपने स्तर पर कुछ व्यापक कार्य करने होंगे कार्येक्रम नहीं। इसकी शरुआत अपने आसपास की झुगी झोपडी मे रहने वाले बच्चो से की जा सकती है , अपने घर मे ही काम करने आने वाले श्रमिकों के बच्चों से की जा सकती है उनके बच्चो को शिक्षित करने, उनके भोजन व् जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने की जिम्मेदारी ली जा सकती है।
जिस तरह से कोविद १९ के चलते लॉकडाउन की स्तिथि मे हमने अपने घर के आसपास रहे वाले मजदूरों व् अपने घर मे काम करने वालों का ध्यान रखा था सरकार एक अपील पर, उसी तरह कोविद १९ के समाप्त होने के पश्चात हमे उन बच्चों का ध्यान रखना होगा जो मजबूरी मे या जबरदस्ती कार्य में धकेले जाते है। उनकी शिक्षा , भोजन व् जरूरी आवश्यकताओं के लिए जाएदा नहीं तो एक परिवार अपनी आय का एक छोटा सा हिस्सा निकाल सकता है।
कोविद १९ की तरह बाल श्रम भी एक महामारी है । यह महामारी तो एक दिन समाप्त हो जाएगी परन्तु यदि बाल श्रम को नहीं रोका गया तो तो यह सभी देशों के लिए भयानक रूप ले लेगी जिससे निकलना आसान नहीं होगा। हमे सरकारी संस्थाओं के साथ कदम दर कदम मिलाकर चलना होगा। सरकार के इस अभियान मे हम भी अपनी एक छोटी सी आहुति दे और बाल श्रम कम करने मे सहयोग करे।
बुलंदियां आपको खुद ही ढूंढ लेंगी मुश्किलों मे मुस्कराने का होंसला न छोड़ो
जय हिन्द ||

Child labour should be abolished & strict action should be taken
ReplyDeleteबहुत अच्छा लेख है। बच्चे देश का भविष्य होते हैं। हमको अपनी तरफ से पहल करते हुए खुद किसी बच्चे को श्रम के कार्य में नहीं लगाना चाहिए और हर सक्षम परिवार को एक असहाय बच्चे की शिक्षा और भोजन का प्रबंध करना चाहिए।
ReplyDeleteVery nice efforts by Dr Babita Agrawal to prevent the child labour. I hope for all the best.
ReplyDeleteDr. O.V.S. Thenua
बाल श्रम के निवारण की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है,क्योंकि हम लोगों में से बहुत से साक्षर लोग ऊपर से तो बालश्रम का विरोध करते हैं,परन्तु बाल श्रमिकों से( काम भुगतान के लालच में) अपने घरों या दुकानों पर काम करवाते हैं। इसके लिए एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है, डॉ बबीता जी को इस वैचारिक अभिव्यक्ति के लिए साधुवाद
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ReplyDeleteएक बच्चा, एक टीचर, एक किताब और एक कलम पूरी दुनिया को बदल सकते हैं। एक अच्छी सोच दुनिया को भी बदल सकती हैं l बबीता जी आपके विचार बहुत ही प्रभाव शाली है। हम आपके साथ है।
Very thoughtful! You have rightly dealt with the topic in the light of Covid-19 crisis.The problem of Child labour in very alarming. Thanks for dealing with such apt topic.!
ReplyDeleteVery nice article to remove one such pandemic from our society for which various countries have made various laws but in absence of heart willing desire of public and government it could not be removed
ReplyDeleteHope such type of article will certainly be able to motivate the Indian not to take work from children
All the best for her I.e. dr babita's journey
ery nice efforts mam to prevent the child labour.
ReplyDeleteआज कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहे देश के सामने आपने अपने लेख के माध्यम से बाल श्रम जैसी समस्या पर हम सबका ध्यान केंद्रित किया है। वास्तव में बाल के साथ श्रमिक शब्द लगना ही अपने आप में पीड़ादायक है। प्रकृति और मानवता की इस जंग में लड़ते हुए हमें आज एक और प्रण लेना होगा कि समाज और देश से बाल श्रम जैसी बीमारी भी जड़ से मिटा दी जाए।
ReplyDeleteVery nice mam
ReplyDeleteVery nice mam🙏
ReplyDeleteMarvellous thoughts in this current situation.
ReplyDeleteProf. Meenu Agrawal