दर्शन प्रभाव


ऐसा माना जाता है कि भगवान की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए क्योंकि जब भगवान का मुख हमारी तरफ होता है तो हम बुरे कर्म करने में हिचकते हैं और सोचते हैं कि भगवान हमें देख रहे हैं परन्तु जब भगवान की पीठ हमारी तरफ होती हैं तो हम यह सोचते हैं कि भगवान नहीं देख रहे हैं। परन्तु वास्तव में भगवान तो कण कण में व्याप्त होतें हैं जो हमारे अच्छे और बुरे दोनों ही कर्मों का हिसाब रखते हैं।

प्रश्न यह उत्पन होता है कि भगवान् की पीठ के दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए? क्या पीठके दर्शन करने से पुण्य समाप्त हो जाते हैं? इस सम्बन्ध मे एक कथा है

जब श्री कृष्ण जरासंध से युद्ध कर रहे थे तब जरासंध की सहायता करने असुर कालयवन युद्ध करने आगया। उसने श्री कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब श्री कृष्ण वहां से भाग निकले (रणभूमि से भागने के कारण ही उनका नाम रणछोड़ पड़ा था)।

जब श्री कृष्ण भाग रहे थे तो कालयवन भी उनके पीछे भागने लगा। भगवान के इस तरह से भागने का कारण यह था कि कालयवन के पिछले पुण्य बहुत ज्यादा थे और ऐसे किसी को भी सजा नहीं दी जा सकती थी जब तक कि उसके पुण्यों का बल शेष रहता है। कालयवन भगवान् की पीठ देखते हुए भागने लगा और इस तरह उसका अधर्म बढ़ने लगा क्योंकि भगवान की पीठ पर अधर्म का वास होता है और उसका दर्शन करने से अधर्म बढ़ता है।

जब कालयवन के पुण्य का प्रभाव खत्म होने लगा तो भगवान कृष्ण एक गुफा में चले गए। जहाँ मुचुकंद नामक राजा निंद्रा में मगन था। राजा मुकुचंद को देवराज इंद्र का वरदान था कि जो राजा को नींद से जगायेगा वह राजा की नज़र पड़ते ही भस्म हो जायेगा।

कालयवन ने राजा मुचुकंद को कृष्ण समझ कर नींद से जगा दिया और राजा की नज़र पड़ते ही वह भस्म हो गया। इस तरह मात्र पीठ के दर्शन करने से उसके पुण्य समाप्त हो गए और वह मृत्यु को प्राप्त हो गया।

आओ विचार करें कि ऐसा क्या कारण है भगवान की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए। जबकि हमारी पीठ मेरुदंड से बनी होती है जो हमें आधार प्रदान करती है। जब हम भगवान के पीठ के दर्शन करते हैं तो पीठ का भाग अँधेरे मे रहता है। जिसकी वजह से हमें कुछ दिखाई नहीं देता है और अंधरे से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन होती है। जिससे बुरे विचार हमारे मन मैं आते हैं।

जब हम मुख के दर्शन करते है तो हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। जिससे अच्छे विचार हमारे मन में आते हैं साथ ही जितने भी शुभ चिन्ह होते है वह सब आगे की ओर होते हैं ओर ये हमें शुभ कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे भगवान के हाथों में कमल, शंख का होना।

भगवान के मुख का दर्शन करना अत्यंत मंगलमय होता है, क्योंकि भगवान के समस्त अंग शुभ लक्षणों से युक्त होते हैं, जैसे भगवान गणेश के कानों में वैदिक ज्ञान, सूंड में धर्म, दाएं हाथ में वरदान, बाएं हाथ में अन्न, पेट में सुख-समृद्धि, नेत्रों में लक्ष्य, नाभि में ब्रह्मांड, चरणों में सप्तलोक और मस्तक में ब्रह्मलोक होता है।

शास्त्रों में भी पीठ के दर्शन करना शुभ नहीं माना गया है। ऐसा माना जाता है कि पीठ के दर्शन करने से दरिद्रता आती है, क्योंकि पीठ पर अधर्म का वास होता है इसलिए पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए। अगर अनजाने में पीठ के दर्शन हो जाएं तो फिर मुख के दर्शन कर लेने चाहिए जिससे से यह दोष समाप्त हो जाता है।

शायद यही कारण रहा होगा की भगवान की परिक्रमा करते समय हम पहले उनके श्री मुख के दर्शन करते हैं उसके बाद परिक्रमा करते हुए पुनः उनके मुख के दर्शन करते हैं जिससे हमारे पुण्य कर्म कम नही होते हैं।

अतः भगवान की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए। इससे हमारे पुण्य कर्मों का प्रभाव कम होता हैऔर अधर्म बढ़ता है। हमेशा मुख के ही दर्शन करने चाहिए।

शरद पूर्णिंमा की हार्दिक शुभकामनायें

Comments

  1. What I understood is keep facing towards your future where divine light is leading you through your karma. Donor indulge in short cuts and wrong way to fulfill vested interest. The Gyan is unlimited. Darshan to face to face hi hote hai.
    Adbhut rachna Evam katha

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  2. wow ma'am...Achieved some new informations through the article...very informative, very interesting, thanks for sharing. Dr. Binaca

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  3. Very nice story.👍Aap ko bhi sharad Poornima ki badhai 🙏🙏

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  4. I believe in a invisible almighty God, so Face or Back of god is not an issue for me.🙏

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  5. Good informative information.
    Prof. MEENU AGRAWAL

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  6. अच्छी व ज्ञानवर्धक ब्लॉग

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  7. Nice blog mam bhagwan to kan kan m h
    Shivani

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  8. Very knowledgeable and interesting story.

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  9. Very knowledgeable and interesting story

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  10. Knowledgeable story mam ..👌👌

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  11. हमारा ईश्वर तो प्रेमयुक्त दिल में बसता है तो कहां उसका मुख खोजें और कहां उसकी पीठ ☺️🙏🌿💦💕

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  12. महत्वपूर्ण जानकारी
    बीना शर्मा

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