कर्मफल
एक साधारण सी कहानी जो यह बताती है कि मनुष्य अपनी चालकी से किस प्रकार दूसरों को ठगने की कोशिश करता है परन्तु अंत मे स्वयं ही अपनेआप को ठग लेता है क्योंकि यह प्रकृति का नियम है कि हम दूसरों को जैसा देंगे वैसा ही पाएंगे, जो बोया जाता है वही उगता है। एक किसान था जो दही और मक्खन को शहर मे बेचने का काम करता था। मक्खन गोल पेड़ो के रुप मे था और प्रत्येक पेड़े का वजन १ किलो था। किसान हमेशा उस मक्खन को एक दुकानदार को बेचकर अपनी जरुरत का सामान लेकर घर आ जाता था। उस दिन भी किसान अपना मक्खन उसी दुकानदार को बेच कर घर आ गया। किसान के जाने के बाद दुकानदार ने मक्खन को फ्रीज़र मे रखना शुरु कर दिया। अचानक उसके मन में ख्याल आया.. क्यों ना एक पेड़े का वजन किया जाये। वजन करने पर एक पेड़ा 900 ग्राम का निकला। हैरत और निराशा मे उसने सारे पेड़ों का वजन कर के देखा परन्तु सभी पेड़े 900 ग्राम के ही थे। अगली बार जब किसान मक्खन लेकर आया तो दुकानदार ने चिल्लाते हुए कहा…दफा हो जा, किसी बेईमान और धोखेबाज से व्यापार करना.. पर मुझसे नहीं। 900 ग्राम मक्खन को 1 किलो कह कर बेचने वाले शख्स कि मैं शक्ल भी देखन...