Posts

Showing posts from January, 2021

कर्मफल

Image
एक साधारण सी कहानी जो यह बताती है कि मनुष्य अपनी चालकी से किस प्रकार दूसरों को ठगने की कोशिश करता है परन्तु अंत मे स्वयं ही अपनेआप को ठग लेता है क्योंकि यह प्रकृति का नियम है कि हम दूसरों को जैसा देंगे वैसा ही पाएंगे, जो बोया जाता है वही उगता है।  एक किसान था जो दही और मक्खन को शहर मे बेचने का काम करता था। मक्खन गोल पेड़ो के रुप मे था और प्रत्येक पेड़े का वजन १ किलो था। किसान हमेशा उस मक्खन को एक दुकानदार को बेचकर अपनी जरुरत का सामान लेकर घर आ जाता था। उस दिन भी किसान अपना मक्खन उसी दुकानदार को बेच कर घर आ गया।  किसान के जाने के बाद दुकानदार ने मक्खन को फ्रीज़र मे रखना शुरु कर दिया। अचानक उसके मन में ख्याल आया.. क्यों ना एक पेड़े का वजन किया जाये। वजन करने पर एक पेड़ा 900 ग्राम का निकला। हैरत और निराशा मे उसने सारे पेड़ों का वजन कर के देखा परन्तु सभी पेड़े 900 ग्राम के ही थे।  अगली बार जब किसान मक्खन लेकर आया तो दुकानदार ने चिल्लाते हुए कहा…दफा हो जा, किसी बेईमान और धोखेबाज से व्यापार करना.. पर मुझसे नहीं।  900 ग्राम मक्खन को 1 किलो कह कर बेचने वाले शख्स कि मैं शक्ल भी देखन...

Trust the act of God

Image
" मन का हो तो अच्छा, ना हो तो ज़्यादा अच्छा , क्योंकि तब ईश्वर के मन का होगा। "  - हरिवंश राय बच्चन  एक बच्चा अपनी माँ के साथ एक दुकान पर सामान खरीदने गया तो दुकानदार ने उसकी मासूमियत देखकर टॉफियों के डिब्बे खोलकर कहा "लो बेटा टाफी ले लो ' पर उस बच्चे ने भी बड़े प्यार से उन्हें मना कर दिया। इसके बाबजूद उस दुकानदार और उसकी माँ ने भी उसे बहुत कहा पर वह मना करता ही रहा। हारकर उस दुकानदार ने खुद अपने हाथ से टाफियां निकालकर उसको दे दी। तब उस बच्चे ने टाफियां ले ली और अपनी जेब में डाल लीं।  लौटते समय उसकी माँ ने पूछा "जब अंकल तुम्हारे सामने डिब्बा खोलकर तुम्हे टाफियां लेने को कह रहे थे तब तुमने नहीं लीं और जब उन्होंने तुम्हें अपने हाथों से दी तो तुमने ले लीं, ऐसा क्यों?  तब उस बच्चे ने बहुत ही सुंदर जबाब दिया। उसने कहा " मेरे हाथ बहुत ही छोटे छोटे हैं अगर में स्वयं टाफियां लेता तो दो या तीन ही आतीं जबकि अंकल के हाथ बड़े बड़े हैं इसीलिए ज्यादा टाफियां मिल गयीं।"  इसी तरह जब हम किसी कार्य को नहीं कर पाते हैं तो हमें निराश नहीं होना चाहिए बल्कि यह सोचना चाहिए कि अव...

दृष्टि से ज्यादा दृष्टिकोण जरुरी

Image
मनुष्य का मन बड़ा ही विचलित होता है। उसे हमेशा ही यह लगता है कि दुनिया मे वही सबसे ज्यादा दुखी है और उसके दुःख से बड़ा किसी का भी दुःख नहीं है। इसीलिए चाहे अनचाहे वह अपने दुखों से कम औरों के सुखों से ज्यादा दुखी रहता है। हर समय उसके दिमाग में यही बात रहती है कि कैसे अपने दुखों को कम करें इसके लिए वह साधु, महात्मा, ज्ञानी, प्रभु, मंदिर सभी जगह अपने दुखों को कम करने के उपाए ढूढ़ता रहता है। परन्तु स्वयं दुखों को कम करने की कोशिश नहीं करता है।  इस चक्कर में वह अपने उन सभी सुःखों का भोग नहीं कर पाता है जो उसे मिले होते हैं। यदि वास्तव में देखा जाये तो पता चलता है कि प्रत्येक व्यक्ति का दुःख दूसरे व्यक्ति के दुःख मुकाबले कम है क्योंकि दृष्टि से ज्यादा दृष्टिकोण जरुरी होता है।  कहानी  बहुत दूर पहाड़ों के बीच एक महात्मा जी रहते थे। उनकी प्रसिद्धि इतनी थी कि लोग दूर दूर से अपनी समस्या लेकर उनके पास समाधान के लिए आते थे। लोग मानते थे कि महात्मा जी उन्हें उनके दुखों से निजात दिलवा देंगे। ऐसे ही कुछ श्रद्धालुओं को महात्मा जी ने तीन दिन इंतजार करवाया, इस बीच वहां कुछ लोग और पहुँच गए।...