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Showing posts from February, 2021

लैंपपोस्ट

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झूठ और सच की लड़ाई में हजारों सच दफन हो जाते हैं इन सच को जिन्दा करने के लिए फिर से एक लड़ाई और करनी होगी जो खुद से खुद के लिए होगी। हो सकता है की इस लड़ाई में कुछ लोग आपसे अलग हो जायें और कुछ नए आपसे जुड़ जाएँ। उनको जाने दे वैसे ही जैसे योग करते समय हम अपनी अनियंत्रित पहली साँस को जाने देते हैं और बाद में आने वाली अगली साँस ज्यादा सुकून देने वाली होती है।  अगली साँस को आने दें अपनी आँखें बंद करें और अपने आप से प्रश्न करें की आप जो कर रहें क्या वो सही है, सोचें! कि जो अलग हो गए क्या वे लोग ज्यादा महत्वपूर्ण थे आपके लिए, या फिर सच आपके लिए ज्यादा सुकून देने वाला है। अब आपका दिल आपको जो भी जबाब देगा वही आपका सही उत्तर होगा। बस एक आखरी प्रयत्न और करना होगा कि दिल और दिमाग की सोच एक करनी होगी।  यदि आपके दिल का जबाब सच है तो यह ज्यादा सुकून देने वाला होगा,और अब आपके सामने एक खुला आकाश होगा जिसमे आप एक अंतहीन सुकून महसूस करेंगे और यदि आपका जबाब झूठ है तो आपको कुछ समय तो अच्छा लगेगा परन्तु बाद में ज्यादा तकलीफदायक होगा। आँखें बंद कर लेने से यह संभव नहीं है की बिल्ली ने कबूतर को नहीं देखा...

समस्या और समाधान

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भगवान बुद्ध अक्सर अपने शिष्यों को शिक्षा प्रदान करते थे। एक दिन उन्होंने शिक्षा प्रदान करने का नया और अनूठा तरीका निकाला। प्रातःकाल जब बहुत सारे शिष्य और भिक्षुक प्रवचन सुनने के लिए उनका इंतजार कर रहे थे, उसी समय भगवान बुद्ध उस स्थान पर पहुंचे। परन्तु आज शिष्य उन्हें देख कर चकित थे क्योंकि आज उनके हाथ में कुछ था। करीब आने पर शिष्यों ने देखा कि उनके हाथ मे एक रस्सी थी। वहां उपस्थित सभी लोग सोच रहे थे की आज भगवान बुद्ध क्या करने वाले हैं? बुद्ध ने आसन ग्रहण किया और बिना कुछ कहे रस्सी में गाँठ लगाने लगे। भगवन चुपचाप तो कभी नहीं रहते हैं और अपने प्रवचनों से सभी को अभिभूत करते हैं। फिर वो आज क्या करने वाले हैं। तभी अचानक उन्होंने सभी से प्रश्न किया "मैंने इस रस्सी में तीन गाँठे लगा दी हैं। क्या यह वही रस्सी है जो गाँठ लगाने से पूर्व थी ?" एक शिष्य ने उत्तर दिया "भगवन! इसका उत्तर देना थोड़ा कठिन है। क्योंकि यह देखने के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। इसका बुनयादी स्वरुप तो वही है परन्तु यह तीन गाँठ लगी हुई दिखाई दे रही है जो पहले नहीं थी जिस वजह से इसे बदला हुआ भी कह सकते है।...