लैंपपोस्ट
झूठ और सच की लड़ाई में हजारों सच दफन हो जाते हैं इन सच को जिन्दा करने के लिए फिर से एक लड़ाई और करनी होगी जो खुद से खुद के लिए होगी। हो सकता है की इस लड़ाई में कुछ लोग आपसे अलग हो जायें और कुछ नए आपसे जुड़ जाएँ। उनको जाने दे वैसे ही जैसे योग करते समय हम अपनी अनियंत्रित पहली साँस को जाने देते हैं और बाद में आने वाली अगली साँस ज्यादा सुकून देने वाली होती है। अगली साँस को आने दें अपनी आँखें बंद करें और अपने आप से प्रश्न करें की आप जो कर रहें क्या वो सही है, सोचें! कि जो अलग हो गए क्या वे लोग ज्यादा महत्वपूर्ण थे आपके लिए, या फिर सच आपके लिए ज्यादा सुकून देने वाला है। अब आपका दिल आपको जो भी जबाब देगा वही आपका सही उत्तर होगा। बस एक आखरी प्रयत्न और करना होगा कि दिल और दिमाग की सोच एक करनी होगी। यदि आपके दिल का जबाब सच है तो यह ज्यादा सुकून देने वाला होगा,और अब आपके सामने एक खुला आकाश होगा जिसमे आप एक अंतहीन सुकून महसूस करेंगे और यदि आपका जबाब झूठ है तो आपको कुछ समय तो अच्छा लगेगा परन्तु बाद में ज्यादा तकलीफदायक होगा। आँखें बंद कर लेने से यह संभव नहीं है की बिल्ली ने कबूतर को नहीं देखा...