लैंपपोस्ट


झूठ और सच की लड़ाई में हजारों सच दफन हो जाते हैं इन सच को जिन्दा करने के लिए फिर से एक लड़ाई और करनी होगी जो खुद से खुद के लिए होगी। हो सकता है की इस लड़ाई में कुछ लोग आपसे अलग हो जायें और कुछ नए आपसे जुड़ जाएँ। उनको जाने दे वैसे ही जैसे योग करते समय हम अपनी अनियंत्रित पहली साँस को जाने देते हैं और बाद में आने वाली अगली साँस ज्यादा सुकून देने वाली होती है। 

अगली साँस को आने दें अपनी आँखें बंद करें और अपने आप से प्रश्न करें की आप जो कर रहें क्या वो सही है, सोचें! कि जो अलग हो गए क्या वे लोग ज्यादा महत्वपूर्ण थे आपके लिए, या फिर सच आपके लिए ज्यादा सुकून देने वाला है। अब आपका दिल आपको जो भी जबाब देगा वही आपका सही उत्तर होगा। बस एक आखरी प्रयत्न और करना होगा कि दिल और दिमाग की सोच एक करनी होगी। 

यदि आपके दिल का जबाब सच है तो यह ज्यादा सुकून देने वाला होगा,और अब आपके सामने एक खुला आकाश होगा जिसमे आप एक अंतहीन सुकून महसूस करेंगे और यदि आपका जबाब झूठ है तो आपको कुछ समय तो अच्छा लगेगा परन्तु बाद में ज्यादा तकलीफदायक होगा। आँखें बंद कर लेने से यह संभव नहीं है की बिल्ली ने कबूतर को नहीं देखा है, उसी तरह एक ही झूठ को बार बार बोलने से वह सच नहीं हो जाता है। 

झूठ कौवे के समान होता है जो कोयल के अण्डों को अपना समझ कर पालता रहता है। उसी तरह हम भी झूठ को पालते रहते हैं और धीरे धीरे उसी को सच मान लेते हैं। अगर जिंदगी को सच्चाई और सुकून के साथ जीना है तो खुद को मजबूत करना होगा। प्रारम्भ में हो सकता है झूठ आपको बरगलाने की कोशिश करे आपको डराए परन्तु यदि आप अपने सच पर कायम रहे तो बाद में सच ही आपको सही मंजिल पर ले जायेगा। 

सच वो तारा है जो अँधेरी रातों को भी रोशन कर देता है, सच रास्ते में लगा लैंप पोस्ट हैं जो प्रत्येक का रास्ता रोशन कर देता है। मगर यह आवश्यक नहीं है की हमेशा सच ही बोला जाये। कभी कभी जरुरत के हिसाब से बोला गया झूठ किसी को फायदा भी पहुंचा सकता है। मैंने इस विषय में एक कहानी पढ़ी थी जो आपको बताती हूँ कि कैसे झूठ बोल कर लोगो ने किसी जरुरत मंद की सहायता की। 

रास्ते में चलते हुए पड़ने वाले लैंपपोस्ट पर एक कागज चिपका हुआ था जिस पर लिखा था कि में बेहद गरीब बुढ़िया हूँ। इस रास्ते पर मेरे ५० रुपए गिर गए हैं जिस किसी को भी मिलें वो निम्न पते पर पहुंचा दे। 

अब जो भी व्यक्ति इस रास्ते से गुजरता और इस कागज को पढता वही उस पते पर जाता ५० रुपए दे आता। जब एक व्यक्ति उस पते पर पहुँचा और रुपए देने लगा तो उस बुढ़िया के आँखों में पानी आगया और वह रोने लगी। वह बाहर आई और हाथ जोड़ कर बोली "भैया! मेरे कोई पैसे नहीं गिरे हैं,पता नहीं किस ने यह कागज लिख कर चिपका दिया है। 

मैंने सब से वहां से कागज हटाने के लिए कहा था परन्तु शायद किसी ने नहीं हटाया। अब जो भी आता है वही पैसे देकर चला जाता है" आप ५०वे सज्जन हो जो मेरी सहायता करने आये हो। मैं कैसे उस व्यक्ति को धन्यबाद दूँ जिसके एक छोटे से झूठ ने मेरे इतनी बड़ी सहायता की है। अब आप जाते समय उस कागज को वहां से फाड़ देना और उसने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए। 

हमेशा सच और हमेशा झूठ दोनों ही नुकसान दायक हो सकते हैं।अतः जो भी बोलें समय और परिस्तिथि के अनुसार अपने शब्दों का चुनाव करे।

Comments

  1. बहुत बहुत बहुत बढ़िया

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर और हृदयस्पर्शी आलेखन, अंतर्मन को गूढ़ता से टटोलने का रास्ता दिखा गया, बहुत बहुत धन्यवाद

    ReplyDelete
  3. यह कहानी दिल को छू गई

    ReplyDelete
  4. Nice article thanks for sharing

    ReplyDelete
  5. बहुत ही बढ़िया

    ReplyDelete
  6. If you believe in true fact everything is possible in your life

    ReplyDelete
  7. Itne acche ideas aate knha se hain, superb from aradhna

    ReplyDelete
  8. Very good story .it is really true

    ReplyDelete
  9. Vrinday Tulsi devyah priyah keshav ch vishnu bhakti padd Devi sapt wati namo namah.

    Maine apne life me bhut se jhut bole hai lekin apni indratripti ke liye ab mai kosis krunga ki mai jhuth sir seva bhav se bolunga nhi to nhi bolunga.

    Hare Krishna 👐

    ReplyDelete
  10. Very nice story ....lie that helps the needy,is really a truth. Dr. Binaca

    ReplyDelete
  11. बहुत सुन्दर भाव और उतनी ही सुन्दर कहानी। यह बिलकुल ठीक है की कई बार किसी के भले के लिए झूठ बोला जाता है परन्तु मै एक सत्य कहानी इसी विषय में बता रहा हूँ, जिसमें झूठ किसी और ने बोला और उसे किसी की भलाई के लिए दूसरे ने प्रयोग किया। क्षमा माँगता हूँ कि नाम याद नहीं है परन्तु कहानी सच्ची है।

    एक स्कूल में हेड मास्टर नै एक बच्चे की माँ को बुलाया और बच्चे का रिपोर्ट कार्ड लिफ़ाफ़े में ंबंद करके दिया और कहा की बच्चे को स्कूल से निकाला जाता है। रास्ते में बच्चा माँ से पूछता है की उसे क्यों स्कूल से निकाला और रिपोर्ट में क्या लिखा है। माँ ने कहा की रिपोर्ट में लिखा है की आपका बच्चा बहुत अधिक सुशिक्षित और जानकार है इसलिए स्कूल में नहीं रह सकता है और इसे आप घर पर ही पढ़ाएँ।
    आगे जा कर बच्चा बहुत बड़ा वैज्ञानिक बना।
    जब उसकी माँ का देहांत हो गया तब एक दिन उनके सामान में उसे वह रिपोर्ट कार्ड बक्से के तह पर मिला। उसने पढ़ा तो आश्चर्यचकित रह गया। उसमें लिखा था की आपका बच्चा मंद बुद्धि का है और किसी भी स्कूल में नहीं पढ़ सकता है अतः घर पर ही पढ़ाएं।

    इस कहानी में, माँ के झूट ने बच्चे की ज़िन्दगी बदल दी। अतः कई बार देखा गया है कि झूट गलत नहीं होता यदि उसे काम में लाने वाले की भावना सही हो।

    आप ऐसे ही प्रेरणादायक कहानियां हमारे साथ साझा कराती रहें।

    ReplyDelete
  12. आज जिस दौर में हम रह रहें हैं, विचित्र है।
    आज शब्दों की वैधता इस से नहीं कि:
    -वह सच है या झूठ, अपितु वह किसने बोले हैं।
    -वह सच है या झूठ, अपितु मेरे लाभ के हैं या नहीं।
    -वह सच है या झूठ, परन्तु मेरी मानसिकता को संतुष्ट करते हैं या नहीं।

    ReplyDelete
  13. We should keep our mind and soul for fresh breath and thoughts which will ultimately enlighten us. This is the essence of story.
    Falsehood may provide you a momentous pleasure but it is not everlasting. Sparingly use of false words may be for the welfare of mankind as was used by”Lord Krishna” during the period of Mahabharata where you will find several instances of use of false words to have a balance between true and false and for the welfare of society at large.

    ReplyDelete
  14. Yadi hamara jhooth Kisi vyakti ki sahayata karta Hai To vah jhooth Na ho Kar sau sach ke barabar Hota Hai

    Kajal D/o Mr. Premraj

    ReplyDelete
  15. Bahot hi sundar story 👍👌👏👏

    ReplyDelete
  16. Very emotional but hit straight to soul. Kash ye duniya power aur paise ke bajaye aese bhav Ko mahatva de.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Kitchen Gardening (Part 4)

Kitchen Gardening (Part 6): Chemical Fertilizer

Kitchen Gardening (Part 5)