जीवन वीणा

यह ब्लॉग लिखते हुए मुझे १ बर्ष व्यतीत हो गया है। समस्त सुधि पाठकों को मेरा कोटि कोटि धन्यवाद। आप सबने मेरा ब्लॉग पढ़ा और अपने बहुमूल्य सुझाव एवं विचार व्यक्त कर मेरे उत्साह एवं ज्ञान में वृद्धि की। इस कोरोना महामारी के दौरान भी आप सब निरन्तर मेरा ब्लॉग पढ़ते रहे। आप सबने मेरी जीवन वीणा को नए सुर एवं मधुरता प्रदान की और उससे निकलने वाले संगीत को धेर्ये पूर्वक सुना। आप सब के सहयोग से ही मैं अपने ब्लॉग को गति प्रदान कर पायी हूँ और अपनी जीवन वीणा को मधुर स्वरों से सजा पा रही हूँ। आशा करती हूँ कि आगे भी आप मुझे सहयोग प्रदान करते रहेंगे। पुनः आप सब का बहुत बहुत आभार।


यह एक ऐसी सुन्दर कहानी ह [जो मैंने कभी सुनी थी], जिसने मुझे बहुत कुछ सोचने के लिए विवश किया और मेरी जीवन धारा को एक नया मोड दिया। उसे मैं आप तक पहुंचना चाहती हूँ।

” एक घर मे बहुत दिनों से एक वीणा रखी हुई थी। पीढ़ीओं पहले कभी कोई उस वीणा को कोई बजाता होगा। परन्तु अब ना ही कोई उसे बजाता था और ना ही उसकी धूल साफ की जाती थी। कभी कभी कोई बच्चा खेल खेल मे उसके तार छेड़ देता था तो घर के लोंगो को वह शोर लगता था और वे नाराज हो जाते थे।

जब कभी कोई बिल्ली छलांग लगा कर उसको गिरा देती तो उसके तार झनझना जाते और घर के लोगो की नींद टूट जाती थी। उससे निकलने वाला संगीत उनको समझ मे ही नहीं आता था, वह उन्हें शोर लगता था, क्योंकि वो उसके मधुर संगीत से अनजान थे और अपने जीवन से दुखी। इसलिए वे उसको बजाना ही नहीं चाहते थे ।

एक दिन घर के सब लोगों ने उसे कूड़े मे फेकने का निश्चय किया। उनका मानना था कि यह जगह घेरती है और घर की शांति मे बाधा डालती है और वो उसको घर के बाहर कूड़े मे फ़ेंक आये।

वहां से गुजरने वाले एक भिखारी ने उस वीणा को उठा लिया और उसके तारों को बड़े प्यार से छेड़ दिया। जब उन लोगों ने उससे निकलने वाले मधुर संगीत सुना तो वे ठिठक कर जहाँ थे वही खड़े रह गए।

वहां से जो भी निकला वो वही ठहर कर रह गया। धीरे धीरे और घरों के लोग भी बाहर आने लगे। भीड़ जमा होने लगी। सब शांति पूर्वक उससे निकलने वाले मधुर संगीत का आनंद ले रहे थे ओर वह भिखारी मंत्रमुग्ध उसको बजा रहा था। आज उन्हें उस वीणा का स्वर ओर संगीत मालूम पड़ा था। जैसे ही भिखारी ने उसे बजाना बंद किया, उन लोगों ने भिखारी से कहा: वीणा हमें लौटा दो यह हमारी है।

भिखारी ने कहा: वीणा उसी की है जो उसे बजाना जानता है ओर तुम, तुम तो उसे फेक चुके हो। अब यह तुम्हारी कैसे हो सकती है? यह सुनकर वे सब भिखारी से लड़ने लगे कि हमें वीणा वापिस चाहिये ।

भिखारी बोला: फिर कचरा इकठा होगा,कोई बच्चा तारों को छेड़ेगा ,बिल्ली उसे गिराएगी ओर आप की नींद ख़राब होगी। यह घर की शांति भंग भी कर सकती है और यह कह कर भिखारी चला गया।“

विचार करें

क्या आपने कभी ऐसा भी सोचा है की जीवन भी एक वीणा के समान है। कभी इससे निकलने वाला संगीत हमें बेसुरा लगता है और कभी वही संगीत हमें मधुर लगने लगता है,आखिर ऐसा क्यों होता है?

शायद हम अपनी जीवन वीणा को ठीक से बजाना नहीं जानते है और छोटी छोटी बातों से कुंठित हो कर उसको नष्ट कर देना चाहते है। परन्तु, जब कोई उसके तारों को जीवन कसौटी पर कस कर बजाने लगता है तो उससे निकलने वाला संगीत हमें मधुर लगने लगता है और तब हम अपने जीवन के उन क्षणों को वापिस पाना चाहते हैं जिनको हमने यूही व्यर्थ कर दिया था।

सोच कर देखे

जीवन भी एक वीणा के समान है जिसे इसे बजाना आता है उसके जीवन मे उतना ही मधुर संगीत बजता है और जो इस जीवन को बोझ समझते है उनकी जीवन वीणा बिना बजे ही रह जाती है। वे हमेशा उसके मधुर संगीत से अनजान रहते है।

जब कभी जीवन मे दुःख आते है तो हम जीवन से निराश होकर अपने आप से दूर भागने लगते हैं और जब कभी हमारे जीवन मैं सुख, संतोष और धेर्ये होता है तो हमें यही जीवन मधुर लगने लगता है। अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप अपने जीवन मे कौन सा रंग भरते हो।पर ध्यान रहे आपको अपनी जीवन वीणा स्वयं बजानी होगी तभी उसमे से मधुर संगीत निकलेगा क्योंकि आप अपने आप को सबसे ज्यादा जानते हैं।

जीवन वीणा एक ऐसी कश्ती है जिस पर सवार होकर अनंत की दौड़ लगायी जा सकती है बस इसे बजाना आना चाहिए ।

Comments

  1. Agar hum sahi disha main and santulit tarike se apna jeeven bitate hai toh hi madur jeeven jee payege,

    ReplyDelete
  2. Interesting story 👏👍
    - Dr. Seema Vir Thenua

    ReplyDelete
  3. Inspiring story written with a beautiful perspective 🌸🙏🏻✨

    ReplyDelete
  4. Interesting story 👌👍👍👌👌

    ReplyDelete
  5. Very interesting

    ReplyDelete
  6. इस कहानी का उद्देश्य यह है कि हम सभी को अपनी जिंदगी जीनी चाहिए न की काटनी चाहिए।

    Kajal D/o Mr. Premraj

    ReplyDelete
  7. बिल्कुल सही कहा उस भिकारी ने।
    जीवन को संतुलित रखना चाहिए

    ReplyDelete
  8. Congratulations on completing one year. May God bless you and give strength to continue writing for years to come.

    ReplyDelete
  9. Jo apne aap ko achhe se jante h vo aapne jivn me kabhi har ni mante chahe conditions kesi bhi ho Name Rashmi

    ReplyDelete
  10. Congratulations Chachi Ji on completion of One year of Your Blog Writing...

    Aap itne sahaj bhaav se apne vichaaron ko kahaniyon ke roop mein vayakt karte hai ki, ye sidhe dil or Dimag mein ghar kar jaatee hai.

    Keep it up...

    Pankaj Aggarwal

    ReplyDelete
  11. Good message for us
    Prof Meenu Agrawal

    ReplyDelete
  12. मेरा जीवन किस के हाथों में है?

    ReplyDelete
  13. Such an inspiring that boosts up positivity.

    ReplyDelete
  14. Sach m hmare jivan ki vina to bjana hmare hatho main h ki use hum kaise bajate hai sahi ya galt

    ReplyDelete
  15. Atyant prerna daayak bahut badiya

    ReplyDelete
  16. सच में जीवन वीणा की तरह ही होता है।इसे मधुर बनाना चाहिये।
    डॉ बीना शर्मा

    ReplyDelete
  17. Congratulations ma'am for this successful journey... U r inspiration for all of us.
    Beautiful story,,,,,
    Dr. Binaca Agrawal

    ReplyDelete
  18. Congratulation on first anniversary of blog writing

    Very interesting and inspirationl story

    ReplyDelete
  19. बहुत सुदंर

    ReplyDelete
  20. मधुर वीणा की प्रेरक गाथा

    ReplyDelete
  21. Yes this is true that we should happily spent our life not only time pass because our life is most important nd very costly dont waste it with talk to here and there we should concentrate only our happily life. Thank you so much mam for motivate us. Take care mam😊

    ReplyDelete
  22. बहुत सुंदर ☺️🙏🌿💦💕

    ReplyDelete
  23. बहुत। बहुत। सुन्दर

    ReplyDelete
  24. What is this life, if full of care
    We have no time to stand and stare

    ReplyDelete
  25. Very true life is as we see it

    ReplyDelete
  26. Quite inspiring and motivating in today's times.

    ReplyDelete
  27. अद्भुत एवं अविस्मरणीय कहानी है जो जीवन के सार को सहज व सुंदर शब्दों में हृदय तक पहुंचा देती है। आदरणीय बड़ी बहन जी आप सदैव हम सभी की प्रेरणाश्रोत रहीं है और इस कहानी के माध्यम से फिर एक बार जीवन का फलसफा समझा दिया। हृदय से आभार। आशा है कि हम अपने जीवन में सभी वस्तुओं एवं व्यक्तियों से प्राप्त सुख को पहचानेंगे भी और अन्य लोगों को प्रेरित भी करेंगे। जै श्री राम।
    आपका अनुज
    अरुण

    ReplyDelete
  28. Your talent determines what you can do. Your motivation determines how much you’re willing to do. Your attitude determines how well you do it.

    ReplyDelete
  29. “Congratulations to you, and wishing you even more success in the future.”

    ReplyDelete
  30. Aap bahut achcha likhte ho

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Kitchen Gardening (Part 4)

Kitchen Gardening (Part 6): Chemical Fertilizer

Kitchen Gardening (Part 5)