दो अनमोल रत्न - समय और धैर्य (Part 2)
गौतम का गौतम बुद्ध बनने का सफर ऐसे ही नहीं पूरा हो गया था। उन्होंने वर्षों तपस्या की और धैर्य बनाये रखा। उनका यह प्रयास लोगों की प्रेरणा का विषय तो बना परन्तु वे लोग धैर्य न रख कर प्रथम प्रयास में ही बुद्धत्व को प्राप्त करना चाहते थे। गौतम बुद्ध के लिए उनके इन प्रश्नों का उत्तर देना सहज था परन्तु प्रश्न करने वालों मे उतना धेर्ये नहीं था और समय का तो नितांत अभाव था। ना तो वे समय को अपनी साधना में लगाना चाहते थे और ना ही धैर्य पूर्वक सही समय की प्रतीक्षा करना चाहते थे। महात्मा गौतम का तेज देखकर सबके मन में वैसा ही तेज और ज्ञान प्राप्ति की अभिलाषा उत्पन्न होने लगती थी परन्तु वे सब उसको सहज ही प्राप्त करना चाहते थे मात्र महात्मा गौतम के एक आशीर्वाद से। परन्तु यह सोचने का प्रयास नहीं करते थे कि बिना धेर्ये रखे और बिना साधना के प्राप्त होने वाली वस्तु सहज तो हो सकती है परन्तु ज्ञान से परिपूर्ण नहीं हो सकती है और न ही मनवांछित फल देने वाली। उनके तेज और ओजस्वी बाणी से प्रभावित होकर ना जाने उनके कितने ही शिष्य बन गए थे परन्तु ज्ञान प्राप्ति की धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा करने के बजाए उन्होंने प...