मानव जीवन का मूल्य
मानव जीवन का मूल्य करोडों में होता है परन्तु हम उसका मूल्य अपनी दुःख और सुख के अनुसार मापते हैं और प्रत्येक व्यक्ति भी अपने जीवन की कीमत अपनी बुद्धि के अनुसार ही लगता है, जबकि उसका जीवन अनमोल होता प्रत्येक व्यक्ति सुखी तथा संतुष्ट जीवन जीना चाहता है और जब वह उस जीवन को प्राप्त नहीं कर पाता हैं तो उसे सबसे आसान तरीका यही समझ आता है कि जीवन ही समाप्त कर दिया जाये परन्तु वह यह नहीं जानता है कि जीवन समाप्त करने से सुख नहीं मिल सकता है। हमारा जीवन अनमोल होता है। अतः इसका मूल्य समझ कर ही हम अपना जीवन सुखी कर सकते हैं। कहानी एक व्यक्ति नदी किनारेआत्महत्या करने पहुंचा। पास में ही संत की कुटिया थी। संत सब देख रहे थे। वह कूदने वाला ही था कि संत ने आवाज लगाई 'ठहर'। उसने कहा रोको मत मुझे मरना ही है, जिंदगी बेकार है। यहाँ कुछ भी नहीं हैं। परमात्मा भी मुझसे रूठ गया है। सबको निहाल कर दिया है पर मुझे कुछ भी नहीं दिया है। संत ने कहा "आज रात ठहर जा चाहे तो कल मर जाना"। संत की बात मान कर वह रात भर ठहर गया। प्रातः संत उसको लेकर राजमहल पहुंचे। राजा को सारा वृतांत सुनाया। फिर उसे कान में...