छोटी शुरुआत
“सफलता कितनी भी बड़ी हो शुरुआत हमेशा छोटी ही होती है” एक छोटी बच्ची तट पर बैठी हुई थी। अचानक एक लहर आयी और ढेरों मछलियों को उसने तट पर ला पटका। मछलियों को तडफ़ता देख उससे रहा नहीं गया। वह एक एक मछली को उठा कर वापिस समुद्र में फेकने लगी। तभी वहां से एक राहगीर गुजरा। बच्ची के प्रयासों को देख कर वह उसके करीब गया और बोला 'बेटी, ऐसा करने से भला क्या फर्क पड़ेगा? पूरे तट पर हज़ारों मछलियां तड़फ रही हैं।' तुम कब तक इन मछलियों को समुद्र में फेकती रहोगी।‘ एक और मछली को समुद्र में फेकतीं हुई बच्ची बोली 'अंकल, इसको तो बड़ा फर्क पड़ेगा।' इतनी छोटी शुरुआत करने से क्या होगा' राहगीर ने पुनः कहा। बच्ची ने कहा 'आप भी एक छोटी शुरुआत करें और एक मछली को समुद्र में फ़ेंक दें। तब छोटी शुरुआत बड़ी होने लगेगी।' मेरे विचार से जब छोटे छोटे मोतिओं को एक धागे में पिरोते हैं तो वह माला बन जाती है। यह होती है एक छोटी शुरुआत। एक छोटा सा बीज जब मिटटी में लगाया जाता है तो वह धीरे धीरे विशाल वटवृक्ष बन जाता है और हज़ारों पक्षियों को बसेरा प्रदान करता है। यह होती है एक छोटी शुरुआत। पहाड़ विशाल होता ह...