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Showing posts from June, 2020

Who Moved My Cheese ?

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इस कहानी मे चार पात्र है Sniff, Scurry (जो कि चूहे है), Hem और Haw (जो कि बौने है) । उन्होंने एक ऐसी जगह ढूढ़ ली जहाँ पर बहुत सारी cheese है। चारों प्रतिदिन cheese खाते और उसका आनन्द लेते थे।  Sniff और Scurry दोनों cheese का आनंद लेते समय अपने आसपास होने वाले परिवर्तन और उसकी मात्रा का भी ध्यान रखते ह। जबकि Hem और Haw केवल वर्तमान में रहते हुए cheese का ही आनंद लेते थे।  एक दिन वो वहां पहुंचे तो देखा कि cheese खत्म हो गयी है। Sniff और Scurry cheese की तलाश मे नयी जगह पर चले गये। जबकि Hem और Haw बेहद परेशान हो गये। उन्होंने वही अपने आसपास cheese को तलाशना शरू कर दिया और ना मिलने पर दूसरों को दोष देने लगे। प्रतिदिन वो उसी जगह पर खोज करते और नाराज़ होते।  एक दिन Haw ने कहा कि शायद Scurry, Sniff नयी cheese की खोज मे चले गये है। हमे भी नयी cheese की खोज मे जाना चहिये। Hem ने कहा उसे कही नहीं जाना है। एक दिन उसकी cheese यहीं पर आएगी। Haw ने कहा हम इतने दिनों से कोशिश कर रहे है परन्तु कुछ नहीं हुआ है। हमे भी उसकी खोज मे जाना चाहिए। परन्तु Hem ने मना कर दिया उसने कहा यदि Haw ज...

जल तरंग

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ये तो हम सभी जानते है कि जल प्रदूषण क्या है और इसके क्या कारण रहे है और क्या परिणाम हो सकते है। सोचना यह है कि क्या कोरोना वायरस ने भी जल प्रदुषण मे अपनी भूमिका का निर्वहन किया है। क्या कोरोना की वजह से जल प्रदुषण कम हुआ है। शायद हाँ , इस वायरस के कारण जल प्रदुषण पहले के मुकाबले काफी कम हुआ है। उधोगो के बंद होने के कारण उनसे निकलने वाले रासायनिक पदार्थो मे कमी आई साथ ही पानी मे निस्तारण की जाने वाली गंदगी मे कमी आयी है। जिसका परिणाम यह हुआ कि पानी के नीचे की सतह दिखाई देने लगी और पानी का रंग भी बदलने लगा , जलीय जीवों की गतिविधिया भी दिखाई देने लगी।  क्या आपने कभी जल तरंग को सुना है, कभी आंख बंद करके उसका आनद लिया है यदि नहीं तो कभी सुन कर देखे कितनी मधुर कितनी शांत ध्वनि। यह जल तरंग आपको उस स्वप्न लोक में ले जाती है जहाँ जलचर इस तरंग की लय पर नृत्ये कर रहे होते है , जल वनस्पतियां ताल दे रही होती हैं और उठती गिरती पानी की लहरें ताल से ताल मिला रही होती है, क्या यह सब हम अपनी खुली आँखों से देखना नहीं चाहेंगे।  जब बारिश की बूंद जमीन पर गिरती तो क्या आपने उनकी ताल, लयवधता, और छनछन...

१२ जून २०२० - विश्व बाल श्रम दिवस

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बाल श्रम की समस्या को दूर करने के लिए १२ जून को विश्व बाल श्रम दिवस मनाया जाता है। १४ वर्ष या उससे कम छोटे बच्चो से मजबूरी मे कार्य कराया जाता है तो कुछ बच्चों से जबरन तस्करी व् वेश्यावृत्ति जैसे कार्यों को कराया जाता है। बर्ष २०२० कोविद- 19 से प्रभवित वर्ष है। इस वर्ष की थीम ' बच्चो को कोविद १९ - महामारी ' है आज के परिप्रेश्ये मे इस महामारी से बच्चे सबसे जायदा प्रभावित होंगे। बाल श्रम मे अनुमानित १५२ मिलियन बच्चे है जिनमे से ७२ मिलियन बच्चे खतरनाक कार्यों मे लगे हुए होते है। बिश्व मे सरकारों द्वारा बाल श्रम क़ानून बनाए जाने की बाद भी बाल श्रम समाप्त नहीं हुआ है। अतः बच्चों को कोविद १९ की पश्चात् उत्पन्न होने वाली समस्या से बचाना है । कोविद १९ समाप्त होते ही भोजन आवास नौकरी व श्रम की समस्याएं उत्पन्न होंगी।  बाल श्रम गरीव देशो मे जाएदा साकार रूप लेता है अतः कोविद १९ का दौर समाप्त होते ही बाल श्रम सबसे जाएदा प्रभवित होगा। इसके लिए अपने स्तर पर कुछ व्यापक कार्य करने होंगे कार्येक्रम नहीं। इसकी शरुआत अपने आसपास की झुगी झोपडी मे रहने वाले बच्चो से की जा सकती है , अपने ...

कोरोना वायरस व् वायु प्रदुषण

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कोरोना वायरस एक ऐसा नाम ऐसी आवाज जिसकी गूंज ने चारों तरफ हाहाकार उत्पन कर दिया है ,क्या हमने कभी सोचा था की कभी कहीं ऐसी गूंज उत्पन होगी जो आतंक का पर्याय होगी , शायद नहीं। फिर ऐसा क्या हुआ की जो जहाँ था वही रुक गया। कही कोई आवाज नहीं कोई शोर नहीं , कही यह पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ का नतीजा तो नहीं , कहीं ऐसा तो नहीं क़ि मानव स्वयं को प्रकृति से ऊपर समझने लगा हो। यही सत्य है और कारण भी जिससे वातावरण दूषित होता चला गया और और हम प्रकृति का संरक्षण करने के स्थान पर उसका दोहन करने लगे ,पशु पक्षियों को आनंद के लिए अपना आहार बनाना शरू कर दिया जिसका परिणाम कोरोना- १९ के रूप मे हमारे सामने है। क्या हमने यह जानने की कोशिश कि यह कोरोना केवल मनुष्यों को ही क्यों हो रहा है जानवरों को क्यों नहीं। आज एक चींटी भी सुरक्षित है इसका कारण है मनुष्य। मनुष्य ही प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर रहा है जानवर नहीं। वायु प्रदुषण वाले वातावरण मे जीने वाले लोग हताश होते है तथा चिड़चिड़े हो जाते है तो उनका वयवहार बदलता है और तनाव होता है। प्रदूषित वातावरण मे सांसें प्रतिक्षण विकारों के साथ आती जाती है और वायु प्रदुषण निश्चित ...

५ जून २०२० - पर्यावरण दिवस

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" चलो इस धरती को स्वर्ग बनाये सभी मिलकर विश्व पर्यावरण दिवस मनाये " | जब जब पर्यावरण दिवस आता है इस प्रकार के उध्बोधन चारों तरफ सुनाई देते है पर क्या वास्तब मे हम ऐसा कोई कार्य कर रहे है यह सोचनीय विषय है। इस दिवस को मनाने की घोषणा ५ जून १९७२ मे संयक्त राष्ट्र संघ ने वैश्विक स्तर पर सामाजिक चेतना लाने हेतु की थी। पर्यावरण दिवस मनाने का उदेश्य केवल ग्लोबल वार्मिंग तथा प्रदुषण को कम करना ही नहीं है बल्कि लोगो मे जागरूकता तथा संवेदनशीलता भी उत्पन करना है. मनुष्य का जीवन ही पृथ्वी का द्योतक नहीं है बल्कि लाखों जैविक प्रजातियां जीव जंतु , मिटटी ,वृक्ष, हवा, पानी, महासागर,समुद्र, नदियां, पठार और जो भी हमारे अस्तित्व व विकास के लिए आवश्यक है उन सब का संरक्षण करना है और उनको सवस्थ बनाये रखना ही जैव विविधता है। मनुष्य जाति का अस्तित्व तथा विकास इनके ऊपर ही निर्भर करता है कयोंकि यही जैव विविधता हमारे जीवन को बनाए रखने मे सेवाएं तथा सुविधाएँ उपलब्ध कराती है  आज कोरोना वायरस के कारन सारा विश्व थम सा गया है जिसका लाभ सबसे ज्यादा पर्यावरण को हुआ है। वातावरण के साफ होने से पानी साफ हुआ है...